आज मै भेड़चाल से परे कुछ ऐसे सिद्धांतों का जिक्र करने जा रहा हूं, जिनसे शायद आपकी सोचने की धारा बदल जाए! ये ऐसे सिद्धांत है जो सामान्य पुस्तकों में उपलब्ध नहीं है, बल्कि उन्हें दुनिया के महान लोगों ने अलग-अलग इंटरव्यूज में शेयर किया है।
अपनी राय और सोच को जकड़ कर अंगद के पैर की तरह मत रखिए कि कोई उसको हिला ना सके।
इससे आप का विकास रुक जाएगा। बदलाव को आने दीजिए। डायनासोर जो लचीला नहीं था, इसलिए प्रकृति के बदलाव को संभाल नहीं पाया। चींटी छोटी होते हुए भी हर बदलाव में खुद को बचा ले गई। जब हवा तेज हो तो झुक जाने में कोई बुराई नहीं है जब हवा नहीं होगी तो फिर से तन कर खड़े हो जाइएगा.. !
आपका स्वभाव कैसा होगा?
क्या आप उसका कुछ हिस्सा आज से ही जीना शुरु कर सकते हैं?
सच तो यह है कि बहुत से लोगों को वाकई धन की जरूरत नहीं है, वे पैसे की होड़ का हिस्सा ही नहीं बनना चाहते, लेकिन इसके बावजूद अब भी पारिवारिक व सामाजिक भेड़चाल में वैसा ही जीवन जी रहे हैं, जैसा सालों से जीते आये है।
स्मार्ट लोगों की समस्या यह होती है कि वह हर बहस को जीतना चाहते हैं लेकिन क्या ऐसा संभव है? कहीं जगह आपको आपसे बेहतर लोग मिलेंगे जो अपने क्षेत्र में माहिर होंगे और वे आपको उस क्षेत्र में हरा देंगे। बहस हारकर आप बैचेन हो जाएंगे, उस व्यक्ति के बारे में नकारात्मक महसूस करेंगे और उस से दूरी बनाने के प्रयास करेंगे। आप अपनी राय की रक्षा करने के लिए बहस करते हैं। यदि आप सिर्फ इतना समझ ले कि दूसरे के पास भी उसकी एक निजी राय है और आप दोनों अपनी-अपनी राय के लिए स्वतंत्र हैं तो फिर बहस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। याद रखिए हर पल जीतने की इच्छा को खत्म कर देना भी बहुत बड़ी जीत है। अब आप हर बहस को जीतने की लालसा को छोड़ दें और कुछ को यूं ही गुजर जाने दे।
कुछ लोग बातें करने में बहुत माहिर होते हैं वे ऐसा जताते हैं मानो उन्हें दुनिया के बारे में सब कुछ पता है वह खुद को परम ज्ञानी समझते हैं लेकिन फिर भी जीवन में उतनी सफलता हासिल नहीं कर पाते इसके विपरीत कहीं लोग बहुत औसत नजर आते हैं और आवश्यक बातें करते हैं और इसके बावजूद अपने लक्ष्य और सपनों को हासिल कर लेते हैं ऐसे लोगों की सफलता को देखकर हमें आश्चर्य भी होता है अच्छे के लिए होता है क्योंकि हम केवल बातों से इंसान का मूल्यांकन करते हैं जबकि मूल्यांकन एक्सेल से होना चाहिए कोई रात दिन सेहत की बातें करें लेकिन अपनी सेहत का ध्यान रखें तो उसे देखकर उसकी कथनी और करनी में फर्क करते आना चाहिए.. !
सोचिये,कुछ भी स्थायी नहीं है तो राय भी बदल सकती है..!
• अक्सर देखने में आता है कि लोग जिद पर अड़े रहते हैं और राय बदलने को तैयार नहीं होते। कुछ लोग तो राय बदलने को बेहद बुरा भी मानते हैं की व्यक्ति अपनी बात से पलट गया। जबकि ऐसा कई बार होता है कि बचपन में जिन चीजों से आप नफरत करते थे, बड़े होकर आप उनसे प्यार करने लग जाते हैं। आपकी किसी व्यक्ति के बारे मे बहुत अच्छी या खराब राय थी परंतु एक-दो घटनाओं के बाद आपकी राय बदल गई।अपनी राय और सोच को जकड़ कर अंगद के पैर की तरह मत रखिए कि कोई उसको हिला ना सके।
इससे आप का विकास रुक जाएगा। बदलाव को आने दीजिए। डायनासोर जो लचीला नहीं था, इसलिए प्रकृति के बदलाव को संभाल नहीं पाया। चींटी छोटी होते हुए भी हर बदलाव में खुद को बचा ले गई। जब हवा तेज हो तो झुक जाने में कोई बुराई नहीं है जब हवा नहीं होगी तो फिर से तन कर खड़े हो जाइएगा.. !
सोचिए, यदि धन की होड़ ना होती तो कैसा जीवन जीते?
आप इस बात पर विचार कीजिए कि अगर आपको मनी कमाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आवश्यकता का धन आपके पास है बल्कि थोड़ा अतिरिक्त भी हैं यदि आपको भविष्य की चिंता ना करनी पड़े तो आप आनंद से भरा कैसा जीवन जिएंगे?
आपकी दिनचर्या क्या होगी?आपका स्वभाव कैसा होगा?
क्या आप उसका कुछ हिस्सा आज से ही जीना शुरु कर सकते हैं?
सच तो यह है कि बहुत से लोगों को वाकई धन की जरूरत नहीं है, वे पैसे की होड़ का हिस्सा ही नहीं बनना चाहते, लेकिन इसके बावजूद अब भी पारिवारिक व सामाजिक भेड़चाल में वैसा ही जीवन जी रहे हैं, जैसा सालों से जीते आये है।
सोचिए, यदि हम हर बहस में जीतने की कोशिश छोड़ दे तो?
स्मार्ट लोगों की समस्या यह होती है कि वह हर बहस को जीतना चाहते हैं लेकिन क्या ऐसा संभव है? कहीं जगह आपको आपसे बेहतर लोग मिलेंगे जो अपने क्षेत्र में माहिर होंगे और वे आपको उस क्षेत्र में हरा देंगे। बहस हारकर आप बैचेन हो जाएंगे, उस व्यक्ति के बारे में नकारात्मक महसूस करेंगे और उस से दूरी बनाने के प्रयास करेंगे। आप अपनी राय की रक्षा करने के लिए बहस करते हैं। यदि आप सिर्फ इतना समझ ले कि दूसरे के पास भी उसकी एक निजी राय है और आप दोनों अपनी-अपनी राय के लिए स्वतंत्र हैं तो फिर बहस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। याद रखिए हर पल जीतने की इच्छा को खत्म कर देना भी बहुत बड़ी जीत है। अब आप हर बहस को जीतने की लालसा को छोड़ दें और कुछ को यूं ही गुजर जाने दे।
सोचिए, यदि आप किसी का बातों से नहीं सिर्फ एक्शन से मूल्यांकन करें..!
कुछ लोग बातें करने में बहुत माहिर होते हैं वे ऐसा जताते हैं मानो उन्हें दुनिया के बारे में सब कुछ पता है वह खुद को परम ज्ञानी समझते हैं लेकिन फिर भी जीवन में उतनी सफलता हासिल नहीं कर पाते इसके विपरीत कहीं लोग बहुत औसत नजर आते हैं और आवश्यक बातें करते हैं और इसके बावजूद अपने लक्ष्य और सपनों को हासिल कर लेते हैं ऐसे लोगों की सफलता को देखकर हमें आश्चर्य भी होता है अच्छे के लिए होता है क्योंकि हम केवल बातों से इंसान का मूल्यांकन करते हैं जबकि मूल्यांकन एक्सेल से होना चाहिए कोई रात दिन सेहत की बातें करें लेकिन अपनी सेहत का ध्यान रखें तो उसे देखकर उसकी कथनी और करनी में फर्क करते आना चाहिए.. !







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